भावसिद्घिकाल

भाव सम्बन्धी फल कब होगा ?

(१) भावेश जिस राशि और अंश में हो उस से त्रिकोण में गोचरवश जब लग्नेश आवे।

(२) लग्नेश जिस राशि में या उससे और अंश में है उसमें या उससे त्रिकोण में जब गोचरवश भावेश आवे।

(३) जब लग्नेश और भावेश गोचरवश एक दूसरे को देखें या एक दूसरे से युक्त हो जाये।

(४) जब भाव कारक गोचरवश उस स्थान पर आवे जहाँ जन्म कुण्डली में लग्नेश वा चन्द्र राशि का स्वामी हो।

(५) जब लग्नेश गोचरवश उस भाव में आवे – – जिस भाव सम्बन्धी विचार करना हो।

चन्द्र लग्न से भी इसी प्रकार विचार करना चाहिए।

जिस भाव का विचार करना है उसका स्वामी किस राशि और किस अंश में है, जब गोचरवश बृहस्पति उस राशि और अंश के त्रिकोण में आता है तब उस भाव सम्बन्धी शुभ फल होता है। जब गोचरवश लग्नेश और षष्ठेश का योग हो तो, लग्नेश की बजाय षष्ठेश दुर्बल हो तो जातक के वश में शत्रु आ जाता है और यदि लग्नेश की बजाय षष्ठेश बली हो तो जातक स्वयं शत्रु के वश हो जाता है।

जिस भावेश की और लग्नेश की तात्कालिक या नैसर्गिक या एक – दूसरे से षष्ठ – अष्टम रहने के कारण शत्रुता हो – – – –  उन दोनों का लग्नेश और उस भावेश का जब गोचरवश योग हो तो उस भाव सम्बन्धी शत्रुता या स्पर्धा या कलह का कारण होता है। किन्तु यदि लग्नेश और किसी भावेश की नैसर्गिक और तात्कालिक मित्रता हो और लग्नेश तथा उस भावेश का गोचरवश योग हो तो उस भाव सम्बन्धी सुख, नवीन कार्य, मित्रता आदि होता है।

सिंह लग्न की कुण्डली में लग्नेश सूर्य है और षष्ठेश शनि है,  दोनों नैसर्गिक शत्रु भी हैं और कुण्डली में भी तात्कालिक शत्रु है तो जब जब सूर्य – शनि योग होगा तब – तब शत्रु सम्बन्धी त्रास होगा और उसी कुण्डली में सूर्य लग्नेश है तथा बृहस्पति पंचमेश है। दोनों नैसर्गिक मित्र हैं और तात्कालिक मित्र भी हो तो, इस कारण जब जब सूर्य और बृहस्पति का योग होगा तब-तब पंचम भाव सम्बन्धित शुभ फल की प्राप्ति होगी।

कोई जातक मकान या भूमि का प्रश्न करता है कि कब गृह लाभ या भूमि लाभ होगा तो देखिये कि जन्म कुंडली में लग्नेश – चतुर्थेश योग गोचरवश होने वाला है क्या?  जब लग्नेश – चतुर्थेश योग हो तब मकान लाभ या भूमि लाभ होगा। किन्तु यह सम्भव तभी होगा जब चतुर्थेश बलवान हो। भावेश के बलवान होने से ही कार्य सिद्धि होती है। यदि भावेश दुर्बल है तो लग्नेश – भावेश का योग होने पर भी कार्य सिद्धि नहीं होगी। साथ में दशा, अन्तर्दशा का भी विचार कर लेना चाहिए।

जैसे लग्न कुंडली और लग्नेश से कहा गया है उसी प्रकार चन्द्र कुण्डली से ( चन्द्रमा जिस राशि में हो उसे लग्न मानकर ) विचार करना चाहिए।

नेहा शाह।

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